भाव निर्झर
-यह रवि वो शशि ,तारिका मंडल सब छिप जाए .
प्रेम दिया प्रकाश दे कुछ और नही दिख पाए .
-ਵੱਡੇ ਹੋਣ ਗੇ ਨਿਜ - ਘਰ ਏ ਸਾਗਰ , ਸਰਿਤਾ ਕੂਲ .
ਸਵਾਂਤ ਬੂੰਦ ਆਸ਼ਿਕ ਲਯੀ ਇਹ ਸਭ ਹੈਨ ਫਿਜ਼ੂਲ .
-ਕਈਆਂ ਕੋਲ ਤੇ ਛੰਦ ਨੇ ਕਈਆਂ ਕੋਲ ਨੇ ਰੰਗ ,
ਵਿਰਲੇ ਟਾਂਵੇਂ ਕੋਲ ਹੈ . ਮਨ ਦਾ ਪਰਮਾਨੰਦ ..
-दुनिया में जो पीर है कोई न उसका पीर .
निर्धन भूखा जब मरे ,लोग कहें तकदीर ..
-मायापति के निधन को कहते महाप्रयाण .
निर्धन के बे ..मोल हैं देखें यहाँ पे प्राण .
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-चले सजन जी चालियो ,गल बय्याँ यू डाल .
सरगम संग बंसी चले तबला संग हो ताल ताल .
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-तन सुंदर मन कांच सा ,रखता सदा बचाए .
जाने वो दिलदार ना ,ये दिल उसको चाहे .
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-चंचल .,चपला , दामिनी ,मेघ तनया उन्मुक्त ,
देखो समय कारीगरी प्रेम प्रकाश के युक्त .
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-ज्वाला मुख की कोटरी पे बनी शीतल झील .
ऐसो है स्वभाव का मौन -मुखर मनमीत
...deepzirvi.8.2.12