Tuesday, 7 February 2012

भाव निर्झर


भाव  निर्झर 


-यह  रवि  वो  शशि ,तारिका  मंडल  सब   छिप  जाए .

प्रेम  दिया  प्रकाश  दे   कुछ  और  नही  दिख  पाए . 

 

-ਵੱਡੇ  ਹੋਣ  ਗੇ  ਨਿਜ - ਘਰ  ਏ  ਸਾਗਰ , ਸਰਿਤਾ  ਕੂਲ .


 ਸਵਾਂਤ  ਬੂੰਦ  ਆਸ਼ਿਕ   ਲਯੀ  ਇਹ  ਸਭ  ਹੈਨ  ਫਿਜ਼ੂਲ .

 

-ਕਈਆਂ ਕੋਲ  ਤੇ  ਛੰਦ  ਨੇ  ਕਈਆਂ  ਕੋਲ  ਨੇ  ਰੰਗ  ,

ਵਿਰਲੇ  ਟਾਂਵੇਂ  ਕੋਲ  ਹੈ . ਮਨ  ਦਾ  ਪਰਮਾਨੰਦ   ..

 

-दुनिया  में  जो  पीर  है  कोई  न  उसका  पीर .

 निर्धन  भूखा  जब  मरे  ,लोग  कहें  तकदीर ..

 

-मायापति  के  निधन  को  कहते  महाप्रयाण .

 निर्धन  के  बे ..मोल  हैं  देखें  यहाँ  पे  प्राण .

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-चले  सजन  जी  चालियो  ,गल  बय्याँ यू  डाल .

  सरगम  संग बंसी  चले  तबला  संग  हो ताल   ताल . 

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-तन  सुंदर  मन  कांच  सा ,रखता  सदा  बचाए .

 जाने  वो  दिलदार  ना ,ये  दिल  उसको  चाहे . 

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-चंचल  .,चपला , दामिनी  ,मेघ  तनया  उन्मुक्त ,

देखो  समय  कारीगरी  प्रेम  प्रकाश  के  युक्त . 

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-ज्वाला  मुख  की  कोटरी  पे   बनी  शीतल  झील .

 ऐसो  है  स्वभाव  का  मौन -मुखर  मनमीत 

 

...deepzirvi.8.2.12

 


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